श्री पल्लीवाल जैन डिजिटल पत्रिका

अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा

(पल्लीवाल, जैसवाल, सैलवाल सम्बंधित जैन समाज)

नियम से ही जीवन में नियंत्रण होता है

एक दिन एक संत के पास एक परिवार पहुँचा। परिवार के बड़े सदस्यों ने संत से कहा, “महाराज जी, यह हमारा बच्चा है। यह न तो मंदिर जाता है और न ही कोई नियम का पालन करता है। कृपया इसे कोई नियम प्रदान करें।”
संत कुछ कहते, उससे पहले ही वह लड़का बोल पड़ा, “महाराज जी, मैं इन नियम-वियम को नहीं मानता। मुझे नियमों पर विश्वास नहीं है। आखिर जीवन में नियमों का क्या महत्व है?”
संत मुस्कुराए और बोले, “बेटा, कोई बात नहीं। पहले यह बताओ कि क्या तुम कोई खेल खेलते हो?”
लड़के ने उत्तर दिया, “हाँ, मैं क्रिकेट खेलता हूँ।”
संत ने पूछा, “अच्छा, यह बताओ कि क्रिकेट कैसे खेला जाता है?”
लड़का बोला, “इसमें दो टीमें होती हैं। दोनों में 11-11 खिलाड़ी होते हैं। एक टीम बल्लेबाजी करती है और दूसरी गेंदबाजी। जो टीम अधिक रन बनाती है, वही जीत जाती है।”
संत ने फिर पूछा, “क्या बल्लेबाज कहीं भी खड़े होकर बल्लेबाजी कर सकता है? क्या गेंदबाज कहीं से भी गेंद फेंक सकता है? और रन कैसे बनाए जाते हैं?”
लड़के ने उत्तर दिया, “नहीं महाराज जी। बल्लेबाजी के लिए एक निश्चित क्रीज़ होती है और बल्लेबाज को उसी के भीतर खड़े होकर खेलना पड़ता है। गेंदबाज के लिए भी निर्धारित क्रीज़ होती है। रन लेने और बाउंड्री की भी निश्चित सीमाएँ होती हैं।”
संत ने पूछा, “यदि बल्लेबाज क्रीज़ से बाहर जाकर खेले या गेंदबाज क्रीज़ से बाहर से गेंद डाले, तो क्या होगा?”
लड़का बोला, “यदि बल्लेबाज क्रीज़ छोड़ देता है तो विकेटकीपर उसे स्टंप आउट कर सकता है। और यदि गेंदबाज क्रीज़ से बाहर से गेंद डालता है तो वह नो-बॉल कहलाती है तथा उसकी टीम पर एक रन की पेनाल्टी लगती है।”
संत ने पूछा, “ऐसा क्यों होता है?”
लड़के ने उत्तर दिया, “महाराज जी, क्योंकि ये क्रिकेट के नियम हैं और क्रिकेट उन्हीं नियमों के अनुसार खेला जाता है।”
संत मुस्कुराते हुए बोले, “अभी तो तुम कह रहे थे कि तुम नियमों को नहीं मानते।”
लड़का तुरंत बोला, “नहीं महाराज जी, नियम तो मानने ही पड़ते हैं। यदि क्रिकेट के नियम न माने जाएँ तो खेल का आनंद ही समाप्त हो जाएगा।”
संत ने कहा, “बिल्कुल सही। जिस प्रकार नियमों के बिना क्रिकेट का आनंद समाप्त हो जाता है, उसी प्रकार यदि मनुष्य अपने जीवन में नियमों का पालन न करे तो उसका जीवन भी अव्यवस्थित और दुःखमय हो जाता है।”
संत ने आगे कहा, “जीवन जीने के भी कुछ नियम होते हैं। हमारे देश, धर्म और समाज के भी अपने नियम हैं। यदि हम उन्हें अपनाते हैं तो जीवन सही दिशा में चलता है। नियमों की अवहेलना करने वाला व्यक्ति गैर-जिम्मेदार और असभ्य नागरिक कहलाता है तथा उसका जीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है।”
उन्होंने समझाया, “हमें अपने जीवन की एक मर्यादा निर्धारित करनी चाहिए। जो कार्य हमारे लिए उचित हैं, उन्हें अपनाना चाहिए और जो अनुचित हैं, उनका दृढ़ संकल्प के साथ त्याग कर देना चाहिए। उदाहरण के लिए, नशा करना हमारे लिए हानिकारक है, इसलिए हमें उसका पूर्णतः त्याग करना चाहिए। इसी प्रकार अन्य सभी बुराइयों से भी नियमपूर्वक दूर रहना चाहिए।”
तब उस लड़के ने पूछा, “महाराज जी, नियमों का पालन करने से क्या लाभ होता है? और यदि हम नियमों का पालन न करें तो क्या हानि होती है?”
संत ने उत्तर दिया, “जो व्यक्ति नियमों का पालन करता है, उसका जीवन व्यवस्थित रहता है। वह अनावश्यक समस्याओं से बचा रहता है और सुख-शांति के साथ जीवन व्यतीत करता है। लेकिन जो व्यक्ति नियमों का उल्लंघन करता है, उसका जीवन धीरे-धीरे संकटों से घिर जाता है। नशा करने वालों, जुआ खेलने वालों और अपराध करने वालों का जीवन देखकर समझा जा सकता है कि नियमों की अवहेलना अंततः सुख और शांति को समाप्त कर देती है।”
संत ने आगे कहा, “नियम जीवन की लगाम हैं। लगाम हटते ही विनाश का मार्ग खुल जाता है। आपने देखा होगा कि जब सांड बेलगाम हो जाता है तो भारी नुकसान करता है। जब हाथी नियंत्रण खो देता है तो सर्वनाश कर देता है। जब नदी अपनी सीमाएँ तोड़ देती है तो शहरों के शहर डूब जाते हैं। जब कोई जंगली जानवर जंगल की सीमा लाँघकर शहर में प्रवेश करता है तो पूरे नगर में दहशत फैल जाती है।”
“इसी प्रकार जल, अग्नि, वायु और पृथ्वी जब अपनी मर्यादा में रहते हैं तो मानव जीवन के लिए वरदान सिद्ध होते हैं, किंतु जब वे संतुलन खो देते हैं तो विनाश का कारण बन जाते हैं।”
संत की बातें सुनकर उस बालक को नियमों का वास्तविक महत्व समझ में आ गया। उसने संत को वचन दिया, “आज के बाद मैं जीवन का प्रत्येक कार्य मर्यादा और नियमों के अनुसार ही करूँगा।”
यह सुनकर उसका पूरा परिवार प्रसन्न हो गया। सभी ने संत को प्रणाम किया और संतोषपूर्वक अपने घर लौट गए।
संदेश
हमेशा याद रखें—नियम हमारी स्वतंत्रता को सीमित करने के लिए नहीं, बल्कि हमारी सुरक्षा, उन्नति और सुखी जीवन के लिए बनाए जाते हैं। नियमों का पालन ही अनुशासित, सफल और सम्मानित जीवन की आधारशिला है।
धन्यवाद।

महेंद्र कुमार जैन (लारा)
शिवजी पार्क अलवर

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