*स्वरचित हाइकु छंद क्र.31 से 40*
*हाइकु मूल रूप से जापान की एक अत्यंत लोकप्रिय और सबसे छोटी काव्य (कविता) शैली है। इसकी मुख्य विशेषता है कि यह केवल तीन पंक्तियों की कविता होती है। इसमें कुल 17 वर्ण (syllables) होते हैं, जिनका क्रम 5-7-5 (पहली पंक्ति में 5, दूसरी में 7, और तीसरी में 5) का होता है।*
*संयुक्ताक्षर, मात्रा, अनुस्वार, चंद्रबिंदु, विसर्ग, हलन्त वाला व्यंजन आदि अलग syllable (अक्षर-खंड) नहीं बनाते हैं।*
*हायकू में संक्षेप में सार गर्भित बहु अर्थ को प्रकट करने वाले शिक्षाप्रद व प्रेरणास्पद विचार होते हैं।*
🔥3️⃣1️⃣
पंख पंछी के
अच्छे , इंसां के हों तो
बर्बादी शुरू।🌾✨
🔥3️⃣2️⃣
संग-साथ से
बनती है ताकत,
बिखरे हार।🌾✨
🔥3️⃣3️⃣
लागी लगन
चाहे छोटी, जीवन
बदल देती ।🌾✨
🔥3️⃣4️⃣
गर हो घृणा
पाप से, तो आसॉं हो
त्याग पाप का।🌾✨
🔥3️⃣5️⃣
बंधी हो झाड़ू
करे सफाई, खुले
तो होवे कूड़ा।🌾✨
🔥3️⃣6️⃣
लक्ष्य पे ध्यान
रखोगे तो चुनौती
चकनाचूर।🌾✨
🔥3️⃣7️⃣
चैन ! महंगा
खरीदें वो , कुछ ना
जिनके पास।🌾✨
🔥3️⃣8️⃣
पाना है हल
छोड़ो उधेड़-बुन
लगाओ ध्यान।🌾✨
🔥3️⃣9️⃣
चाहे हो मुक्त
खयाली, बंधे रहो
बुनियाद से।🌾✨
🔥4️⃣0️⃣
कर लो प्रेम
अच्छाई से, तो आसॉं
हो आचरण।🌾✨
हाइकु रचयिता* :-
राजेन्द्र प्रसाद जैन
76 मुक्तानंद नगर जयपुर