*क्र.16 से 30*
👉1️⃣6️⃣
यकीं आशा से,
लक्ष्य आसॉं ही नहीं
संभव बने।
👉1️⃣7️⃣
बदन मिट्टी
सांसें उधार ; मद
किस बात का।
👉1️⃣8️⃣
मोही मनवा
विकार को ही सुधा
की धार माने।
👉1️⃣9️⃣
धन दान सा,
रोग लालच सा, ना
कोई जग में।
👉2️⃣0️⃣
ज्ञानी मन तो
सदाचार को, जीने
का सार माने।
👉2️⃣1️⃣
परिवर्तन
है कष्टकारी , पर
होना जरूरी।
👉2️⃣2️⃣
सेवा करते
जो दया से प्रेरित
वो सुख पाते।
👉2️⃣3️⃣
कभी चुप्पी भी
ताकत बनती,ना
कि कमजोरी ।
👉2️⃣4️⃣
तूफॉं में कश्ती
अहं में हस्ती, प्रायः
डूब जाती है।
👉2️⃣5️⃣
बचोगे तब
ही तो बचा पाओगे,
सो बचे रहो।
👉2️⃣6️⃣
सुंदर पुष्प
सी है सिद्धि ,सुगंध
है विनम्रता।
👉2️⃣7️⃣
समस्याओं पे
होगा ध्यान तो, मिले
ना सफलता।
👉2️⃣8️⃣
रिश्ते बिखरें
ना, दिल से सहेज
रखो रिश्तों को।
👉2️⃣9️⃣
दुःख ! जो औरों
का समझे , उस का
ईश्वर हरे।
👉3️⃣0️⃣
कुछ पलों के
बिगड़ने से , व्यर्थ
नहीं जिन्दगी।
*हाइकु रचयिता* :-
राजेन्द्र प्रसाद जैन
76 मुक्तानंद नगर जयपुर