कर्मों की खेती में जाने-अनजाने जो बीज आपके द्वारा पड़ जाते हैं देर-सबेर उनका अंकुरण निश्चित ही होना है ! प्रकृति के अपने सिद्धांत हैं वो अपने नियमों पर सदैव अटल रहती है !
यदि आप पौधों को पानी देते हैं तो वह स्वत: हरा भरा रहेगा और यदि आपने उसकी उपेक्षा की तो उसे मुरझाने में भी वक्त नहीं लगता ! निश्चित ही स्वर्ग और नरक दोनों यहीं हैं ! जिन लोगों ने अच्छे कर्म किए उनके लिए ये दुनिया स्वर्ग बन गई तो जिन लोगों ने बुरे कर्म किए उनको यहीं नरक का आभास होने लगा !
इस दुनिया में केवल चाहने मात्र से कुछ भी प्राप्त नहीं हो जाता है ! यहाँ जो भी और जितना भी आपको प्राप्त होता है, वह निश्चित ही आपके परिश्रम और आपके सद्कर्मों का पुरस्कार होता है !
कर्म के जो बीज इस प्रकृति में बोए जाएंगे समय आने पर उसकी फसल भी अवश्य काटनी ही पड़ेगी ! फूलों की खेती करने वाले को ये प्रकृति खुशबू एवं सौंदर्य स्वतः प्रदान कर देती है !