श्री पल्लीवाल जैन डिजिटल पत्रिका

अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा

(पल्लीवाल, जैसवाल, सैलवाल सम्बंधित जैन समाज)

परिवर्तन

अच्छी थी पगडंडी अपनी, सडकों पर तो जाम बहुत है।
फुर्र हो गई फुर्सत अब तो, सबके पास काम बहुत है ।।

नहीं जरूरत बूढों की अब हर बच्चा बुद्धिमान बहुत है ।
उजड गए सब बाग-बगीचे, दो गमलों शान बहुत है ।।

मट्ठा, दही नहीं खाते है, कहते हैं, जुकाम बहुत है।
पीते हैं जब चाय,तब कही, कहते हैं, आराम बहुत है ।।

बंद हो गई, चिट्ठी,पत्री, व्हाट्सएप्प पर, पैगाम बहुत है।
झुके – झुके स्कूली बच्चे, बस्तो में सामान बहुत है ।।

नहीं बचे कोई सम्बंधी, अकड, ऐंठ, अहसान बहुत है ।
सुविधाओं का ढेर लगा है, पर इंसान, परेशान बहुत है ।।

संजय जैन जयपुर

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