अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा के 56 वर्ष पूर्ण हो जाने पर विवेचन करना होगा कि महासभा अपने उद्देश्यों को पूर्ण करने में कितनी सफल रही है। संगठनात्मक रूप से कितनी संगठित हुई है, कितनी मजबूत हुई है । इस पर हमे चिन्तन करना है ।
महासभा प्रारम्भ से लेकर पिछले 6-7 वर्ष पूर्व तक प्रगति की ओर अग्रसर होती जा रही थी। पिछले 5-6 वर्षो में महासभा की गतिविधियाँ ठप्प सी हो गई है। प्रगति की और बढने के बजाय गतिविधियों में विराम सा लग गया है। संगठनात्मक रूप से भी कमजोर होती गयी है।
वर्तमान कार्यकाल में संगठन को बहुत बड़ी क्षति पहुॅची है। महासभा दो गुटो में बट गयी है। हम सभी के लिए यह बहुत ही गंभीर विषय है। हमें विचार करना है कि कैसे दो गुटों को एक किया जाये। समाज के अधिकांश व्यक्तियों की यही भावना है कि महासभा के दोनो गुट एक हो । महासभा सशक्त हो संगठनात्मक रूप से मजबूत हो। इसके लिए मिल बैठकर विचार करना होगा।
समाज के अग्रणीय महानुभावों को आगे आना होगा दोनो पक्षों को एक साथ बैठाना होगा। वर्तमान में शीर्ष पदाधिकारियों को अपना अहम छोडना होगा। जो भी गलतियाँ हुई हैं। उन्हें दूर करना होगा। उसके बाद महासभा की उन्नति के लिये निम्न कार्य करने चाहिए ।
युवाओं के लिये:-
महासभा अभी तक संगठनात्मक रूप से उतनी मजबूत नही हो पाई है जितना हम आशान्वित थे, अभी तक हम समाज के सभी लोगों को भावनात्मक रूप से महासभा से नही जोड पाये है। विशेषकर युवा पीढी को, इस पर हमे विशेष ध्यान देना होगा। महासभा द्वारा आखिल भारतीय स्तर पर युवा गौरव सम्मान समारोह होने चाहिए। पूर्व में महासभा द्वारा समाज की शिक्षा, चिकित्सा, विज्ञान, साहित्य आदि क्षेत्रों एवं उच्च पदों पर आसीन प्रतिभाओं के सम्मान समारोह हुए है। महासभा द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर पूर्व की भाँति प्रति वर्ष समाज के प्रतिभावान विधार्थियों का सम्मान अवश्य रूप से किया जाना चाहिए। जिससे ऐसे प्रतिभावान विधार्थी गौरवान्वित महसूस करे, एवं समाज के अन्य विधार्थी भी उनसे प्रेरणा ले सकें ।
युवाओं को रोजगार एवं उच्चशिक्षा, टेक्निकल शिक्षा प्राप्त करने के लिए समाज के ही उच्चतम पदो पर रहे या वर्तमान में आसीन आई.ए.एस., आई.पी.एस. आई.आर.एस, उच्च अधिकारियों एवं वर्तमान समय के अनुसार आई.आई.टी., एम. टेक शिक्षा प्राप्त समाज के युवाओं से संवाद कार्यक्रम कराने चाहिए। युवाओं के लिए महासभा द्वारा रोजगार मेले लगाये जाने चाहिए । उक्त प्रकार की गतिविधियाँ होगी तो निश्चित रूप से समाज का युवा वर्ग – महासभा से जुडेगा ।
सामाजिक गतिविधियों में अपेक्षाकृत कम सफलताएँ मिल पाई है। ऐसा प्रतीत होता है कि वैवाहिक सुधार, अन्तर जातीय विवाह दहेज एवं समाज में वर्तमान में आई अन्य बुराईयों आदि विपय महासभा के कार्यक्रमों से अलग हो गये है, उन पर विचार विमर्श करना समाज के ज्यादातर बन्धु सारहीन मानते है। उपरोक्त सभी विषयों के लिए एक दो – पाँच दस व्यक्ति जिम्मेदार नही है । समाज के अधिकांश व्यक्ति कमोवेश दोषी है।
संगठनः-
महासभा के संगठन को सुदृढ बनाने के लिए महासभा के पदाधिकारियों को महासभा की शाखाओं में भ्रमण करना चाहिए । जहाँ शाखाऐं नही हैं उन स्थानों मे भी भ्रमण करके वहाँ शाखाओं का गठन करना चाहिए । शाखाओं में जाकर महासभा के पदाधिकारियों वहाँ निवास करने वाले समाज के बन्धुओं के साथ बैठक कर, उन्हे महासभा की गतिविधियों की जानकारी देवें। शाखाओं में हो रही गतिविधियों की जानकारी प्राप्त करे। शाखाओं में अधिक से अधिक आजीवन सदस्य बनाये। शाखाओं को कार्य योजना दे। युवक मण्डल एवं महिला मण्डलों का गठन करना चाहिए। निश्चित रूप से महासभा के पदाधिकारियों को इस प्रकार के भ्रमण से शाखाओं से सक्रियता बढेगी। शाखा सदस्यों का महासभा से जुडाव होगा ।
महासभा को वर्ष में एक बार महिला सम्मेलन युवक सम्मेलनों का आयोजन करना चाहिए। जिससे युवा और महिलाएं समाज से भावनात्मक रूप से जुड सके। जब से महासभा के पदाधिकारियों का शाखाओं में भ्रमण कम हुआ है महासभा संगठनात्मक रूप से कमजोर होती गई है।
सामूहिक विवाह एवं परिचय सम्मेलन:-
महासभा को अखिल भारतीय स्तर पर सामूहिक विवाह आयोजन कराने पर विशेष ध्यान देना चाहिए। पिछले 5-6 वर्षो से सामूहिक विवाहों का आयोजन महासभा द्वारा बन्द ही कर दिया गया है। वर्तमान समय में सामूहिक विवाह हमारे समाज के लिए उपयोगी सिद्द हो सकते है। सामूहिक विवाह आयोजन के लिए कडी मेहनत करनी पडेगी । महासभा कार्यकारिणी का इस कार्य के लिए एक दो टीम बनानी पडेगी । इस कार्य में पूर्व में सक्रिय रहे समाज जनो को इन टीमों मे सम्मिलित करा जावें । यह टीमे शाखाओं कस्बो, गॉवों में जाकर सामूहिक विवाह के लिये प्रेरित करे । सामूहिक विवाह आयोजन में अच्छी और सुन्दर व्यवस्थाएँ की जाए तो समाज के कुछ महानुभाव, युवा सामूहिक विवाह के लिए अपनी सहमति प्रदान कर सकते है।
सामूहिक विवाह से पूर्व विवाह योग्य युवक-युवतियों का परिचय सम्मेलन आवश्यक रूप से होना चाहिए। वर्तमान समय में अभिभावक गणों को अपने विवाह योग्य पुत्र-पुत्रियों के संबंधों के लिये परिचय सम्मेलन सहायक हो सकता है। विवाह योग्य युवक युवतियों की परिचय पुस्तिका का प्रकाशन भी सम्मेलन से पूर्व होना चाहिए ।
चिकित्सा सहायता कोष:-
महासभा का आखिल भारतीय स्तर पर एक चिकित्सा सहायता कोष आवश्यक रूप से होना चाहिए। आपकी जानकारी में लाना चाहूँगा कि दिनांक 06.03.2005 को श्री महावीर जी की कार्यकारिणी की मीटिंग में महासभा चिकित्सा सहायता कोष की स्थापना की जा चुकी है। उसी मीटिंग में चिकित्सा सहायता कोष की नियमावली कार्यकारिणी द्वारा स्वीकृत की जा चुकी है। उस समय श्री पल्लीवाल जैन पत्रिका में इस नियमावली का प्रकाशन भी हो चुका है। इस कोष में उस वक्त (2011 तक) 1,81,000 रू एकत्रित किये जा चुके थे। उस कोष में से उस वक्त समाज के 8 जरूरतमंद बीमार व्यक्तियों को 88000 रू. की राशि सहायता के रूप में महासभा द्वारा प्रदान की गई थी।
वर्तमान समय में इस कोष का पुनः नियमित प्रारम्भ किये जाने की आवश्यकता है। कोष में अधिक से अधिक राशि एकत्रित करके समाज के जरूरतमंद व्यक्तियों की बीमारियों में उन्हे आर्थिक सहायता प्रदान की जा सकती है। समाज में चिकित्सा सहायता कोष में दान देने वाले दान दाताओं की कोई कमी नही है। अभी हमने देखा कि हमने पिछले दिनों 3 महिने में समाज के तीन जरूरतमंद व्यक्तियों के इलाज में आवश्यकतानुसार मदद की गई थी। पहले वाले व्यक्ति के ईलाज के लिये 12 लाख रूपये, दूसरे व्यक्ति के ईलाज में 5,50,000 रूपये एवं तीसरे व्यक्ति के ईलाज में 1 लाख रूपये की आर्थिक सहायता समाज जनों द्वारा बढ़ चढ़ कर की गई थी। महासभा चिकित्सा सहायता कोष को प्रारम्भ करने में वर्तमान पदाधिकारियों को प्रयास करने चाहिए।
समाज की जनगणना:-
महासभा को समाज की जनगणना का कार्यक्रम भी हाथ में लेना चाहिए । पूर्व में समाज की अखिल भारतीय स्तर की जनगणना निर्देशिका का पूर्व का प्रकाशन हुआ था जिसका विमोचन दिनांक 28 मई 2011 को खेरली में आयोजित सामूहिक विवाह व परिचय सम्मेलन के अवसर पर हुआ था। इस निर्देशिका में समाज के 3140 परिवारों का सम्पूर्ण विवरण प्रकाशित हुआ था । दिनांक 12 नवम्बर 2011 को इस निर्देशिका के द्वितीय भाग का विमोचन श्री सोनागिर जी, सम्मेलन में किया गया था। द्वितीय अंक में 243 परिवारों का विवरण प्रकाशित किया गया था। उक्त जनगणना को 14 वर्ष हो गये है । अतः पुनः समाज की जनगणना आवश्यक है। महासभा को समाज की उन्नति के लिये और भी अनेक कार्य है। जिसका उल्लेख आगे किया जावेगा ।
महासभा की उन्नति के लिये हम सभी को संगठित होकर प्रयास करने होगे ।
श्रीचन्द जैन
पूर्व महामंत्री