जब महासभा की वर्तमान छवि जेहन में आती है तो मन द्रवित होता है कि हमारे पूर्वजों के द्वारा जिस पौधे का बीज वपन किया, वो वटवृक्ष बनकर समग्र पल्लीवाल समाज को छांव देता रहा। फल के रूप में नए रिश्ते बनते, विवाह योग्य युवक युवतियों की तलाश को पूर्ण करने का मंच बना। विधवा, आर्थिक रूप से विपन्न बन्धु बहिनों के लिए सहयोग की संस्था बनने का काम किया “महासभा ” ने।
सुदूरवर्ती क्षेत्रो में रह रहे समाज बंधु जो संचार के साधनों के अभाव में दूर होगये उनसे पुनर्मिलन का सद्कार्य किया। समग्र जैन समाज मे पल्लीवाल जैन महासभा की एक अद्वितीय पहचान रही। सर्व आमनाओ को समदृष्टि से देखने वाला पल्लीवाल समाज की कार्यशैली रेखांकनीय रही है।
लेकिन विगत आम चुनाव में बाहुबल के आधार पर हस्तिनापुर में जो हुआ वो सर्वसमाज को शर्मसार करने वाला कृत्य था। अति महत्त्वाकांशी तथाकथित नेताओ ने जिस तरह से समाज का विश्वास तोड़ने का काम किया वो सर्वथा निंदनीय है।
महासभा का अभिप्राय है समाज के वो महान लोग जो वैचारिक, सामाजिक दृष्टि से परिपक्व है उनके समूह से ही महासभा बनती है फिर वो समाज का नेतृत्व करते है। समाज को रचनात्मकता के बल पर आगे बढ़ाते है। जिससे समाज प्रगति के मार्ग पर अग्रसर होता है।
लेकिन समाजनीति के स्थान पर नेतृत्व कर्ताओं की अतिशय व अतिरंजित राजनीतिक महत्त्वाकांक्षा ने महासभा को विद्रुपित कर दिया।
ये सरासर समाज के मतदाताओं की जनभावना का अपमान नही अपितु चीरहरण है।
अभी अलवर में अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा के तत्वाधान में हुआ अखिल भारतीय सम्मेलन एक सकारात्मक प्रयास है। जिसमे एक नही अनेक कार्यक्रम सफलता के साथ सम्पन्न हुए। यदि इस तरह के आयोजन होते है तो महासभा की प्रासंगिकता स्वयंसिद्ध है। दूसरा इससे समाज मे सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
समाज की अखंडता महत्त्वपूर्ण है बजाय व्यक्ति निष्ठा के। आज कतिपय नेता समाज को भी भाई भतीजावाद से मुक्त नही रखना चाहते। जिसकी वजह से अपनी ढपली अपना राग चल रहा है।
जो महासभा की भावना के प्रतिकुल कार्य कर रहे है उन्हें समाज कभी माफ नही करेगा।
अलवर शाखा के चुनाव में बाहुबल के नाम पर लोकतंत्र की हत्या की गई ये किसी से छिपी नही है। निर्वाचित पदाधिकारीयो के स्थान पर अपने चहेतों को रेवड़ी स्वरूप पदाधिकारी बना दिये ये भी उन मतदाताओं का अपमान है जिन्होंने उन्हें चुना।
आखिर समाज को कहा लेकर जाएंगे ये आत्मवंचना करने वाले नेता?
विचारणीय है कि समाज का वो वर्ग जो स्वयं महासभा के पदाधिकारी रहे है आज उनकी आंखों पर भी मोह और छद्म अनुराग की पट्टी बंधी हुई है वो भी कुमार्गियो के साथ खड़े हुए है।
इन पदाधिकारियों ने समाज के आमजन का विश्वास तोड़ने का काम किया है।
सूत्रों से पता लगा है कि महासभा की पूर्व कार्यकारिणी ने अपना प्रभार वर्तमान अध्यक्ष को हस्तांतरित नही किया। ये भी उनके नेक इरादे नही है ये दर्शाता है।
आज महासभा कलियुग की काली छांया से आवृत है। चारो ओर अशांति का कोलाहल मचा हुआ है।
जीत ले विश्वास सबका
कर्म कौशल के सहारे।
बुद्धि बल से नष्ट कर दे,
शत्रु के षड्यंत्र सारे।।
पवन जैन परवैनी
मानसरोवर जयपुर