
श्री क्रांति कुमार जी जैन साहब के निधन का समाचार सुनकर अत्यन्त दुख हुआ और ऐसा लगा कि कहीं कुछ रिक्तता सी आ गयी है और पल्लीवाल समाज की एक पीढ़ी का अन्त हो गया है। खैर, भगवान की व्यवस्था के आगे हम सब नतमस्तक हैं।
श्री क्रांति कुमार जी जैन साहब जी का जन्म श्री अमीर चन्द जी जैन साहब के घर जयपुर में हुआ। श्री अमीर चन्द जी जैन साहब आगरा के रहने वाले थे वैसे मूलतः उनका परिवार रणधीरगढ जि. भरतपुर राजस्थान में निवास करता था। श्री अमीरचन्द जी के चार पुत्रों में श्री क्रांति कुमार जी सबसे बड़े थे। उनकी प्राथमिक शिक्षा जयपुर हुई तथा कालेज एवं यूनिवर्सिटी की शिक्षा आगरा में हुई।
शिक्षा के पश्चात श्री क्रांति कुमार जी ने राजस्थान सरकार के कृषि विभाग में विभिन्न पदों पर रहते हुए उच्च पद पर पहुँच कर अपनी बहुमूल्य सेवा प्रदान की। सरकारी सेवा में रहते हुए ही श्री क्रांति कुमार जी ने पल्लीवाल समाज को व्यवस्थित एवं वैधानिक रूप से संगठित कर आज के भव्य स्वरूप समाज की संरचना की शुरुआत 1970 के दशक में की थी और अपने अथक प्रयासों को जीवन पर्यन्त जारी रखते हुए अपने पूरे जीवन को समाज सेवा में समर्पित कर दिया।
मुझे सन् 1966 में श्री अमीरचन्द जी जैन साहब के बनीपार्क, जयपुर स्थित घर जाने का प्रथम अवसर प्राप्त हुआ। उस समय में जयपुर में पढ़ाई कर रहा था तथा अपने फूफा जी स्व. श्री हुकम चन्द जी जैन मण्डावर वालो के पास रहा करता था और श्री हुकम चन्द जी का श्री अमीर चन्द जी जैन साहब के यहाँ आना जाना था। इस प्रकार मैं भी श्री हुकम चन्द जी जैन साहब के साथ जाता था। वहीं पर स्व. श्री क्रांति कुमार जी से मुलाकात हुई थी।
इस सब के उपरान्त सन 1969 में विधिवत पल्लीवाल जैन समाज का वैधानिक रूप से संगठन का रजिस्ट्रेशन हुआ जिसका श्रेय श्री क्रांति कुमार जी जैन साहब को ही जाता है। उनके समाज को दिशा देने से लेकर आज तक के स्वरूप को कई विद्वानों ने अपने शब्दों में प्रकट किया है जो इस माह की पल्लीवाल जैन डिजिटल पत्रिका में आपको पढ़ने एवं जानने को मिलेगे ।
अन्त में, मैं श्री वीर-प्रभु से कामना एवं विनती करता हूँ कि स्व.श्री क्रांति कुमार जी जैन साहब की पवित्र आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान प्रदान करें। अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन समाज संगठित रहे और दिन-प्रति-दिन उन्नतिशील रहे, श्री क्रांति कुमार जी द्वारा प्रतिपादित सिद्धान्तो को आगे बढ़ाते रहे, यही उनको सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
रमेश चन्द पल्लीवाल
प्रधान सम्पादक