श्री पल्लीवाल जैन डिजिटल पत्रिका

अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा

(पल्लीवाल, जैसवाल, सैलवाल सम्बंधित जैन समाज)

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रिश्तों की गर्माहट

आजकल देखने में आ रहा है कि हमारे पारिवारिक एवं सामाजिक रिश्ते काफी मजबूत एवं गहरे हुआ करते थे यानी रिश्तों में काफी गर्माहट महसूस की जाती थी वो अब दरक रहे है जैसे बर्फ पिघलती है। वहीं हालात हमारे पारिवारिक रिश्तों का होता जा रहा है।

मुझे याद पड़ता है जब हम गांव में स्कूल में पढ़ा करते थे यानि अब से 60 वर्ष पूर्व हमारे रिश्तेदारियों में कोई भी उत्सव या गमी आदि का समाचार प्राप्त होता था तो उनके यहाॅ जाने की बात परिवार में विमर्श का विषय हुआ करता था और घर का या परिवार का मुखिया यह निर्देशित करता था कि फलाना वहाँ जायेगा और फलाना वहाँ जायेगा, रिश्तेदारी चाहे कितने ही दूर की क्यों ना हो ।

मगर आज की तारीख में नजदीकी रिश्तेदारियों में होने वाले उत्सवों आदि के कार्यक्रमों में सम्मिलित होने में कतराते हैं। इसका कारण भी है क्योंकि आजकल ज्यादातर एकल परिवार होते जा रहे है। जिसके अन्तर्गत काम धन्धा या नौकरी से छूट्टी आदि का झंझट होने की वजह से एवॉईड कर देते है। परिवार का जो मुखिया हुआ करता था उसकी आज के समय में कोई कीमत नहीं रह गयी है।

समाज को उपरोक्त बातों पर संज्ञान लेना चाहिये जिससे रिश्तो की गर्माहट बची रहे और समाज हर स्तर पर जुड़ा या सगठित रहे। परिवारों के घटते संख्या बल पर ध्यान केन्द्रित किया जाने की आवश्यकता है।

रमेशचन्द पल्लीवाल
सम्पादक

This Post Has One Comment

  1. Devendra Jain

    Ramesh ji, bahut sahi vastvikta aapne batai hey,yahan tak ki koi Gami ho tab bhi Jane ke liye pariwar jano ke pas samya abhav rahta hey.vicharniya bindu hey.

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