श्री पल्लीवाल जैन डिजिटल पत्रिका

अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा

(पल्लीवाल, जैसवाल, सैलवाल सम्बंधित जैन समाज)

निर्मलता

आदमी मंदिर तक तो पहुँच जाता हैं मगर भगवान तक नहीं पहुँच पाता ! मंदिर तक पहुँचना आसान है किंतु भगवान तक पहुँचना बहुत कठिन !

चरण हमें मंदिर तक लेकर जाते हैं और आचरण भगवान तक ! चरण समर्थ होगा तो वो हमें मंदिर तक पहुँचा देगा और आचरण स्वच्छ होगा तो वो हमें भगवान तक पहुँचा देगा !

मानव मन की विकृतियां, काम क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार ही मंदिर और भगवान के बीच का पर्दा है ! जब तक इन बुराइयों का पर्दा नहीं हट जाता, तब तक मंदिर में पहुँचने के बावजूद भी हम भगवान से कोसों दूर होते हैं !

मंदिर तक पहुँचना तन का विषय है और भगवान तक पहुँचना मन का !

।। निर्मल मन जन सो मोहि भावा ।।

अर्थात जहाँ मन की निर्मलता है, मन की सरलता है, मन की निष्कपटता है, वहाँ भगवान का वास अवश्यमेव है !

मंदिर बुहारने के साथ-साथ मन को बुहारने और उसे स्वच्छ करने पर भी जोर दिया जाए तो भगवान तक पहुँचना और भी आसान हो जाएगा !

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