श्री पल्लीवाल जैन डिजिटल पत्रिका

अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा

(पल्लीवाल, जैसवाल, सैलवाल सम्बंधित जैन समाज)

जिन्दगी एक यात्रा है

है खुशहाली मानस,

जन्म के समय नाम नहीं होता, मात्र श्वासें होती हैं और  मृत्यु के समय नाम तो होता है, पर श्वासें नहीं होती । इन्हीं साँसे और नाम की यात्रा ही जीवन जीने की अवधि ईश्वरिय देन है, यह है जीवन यात्रा ।

इस यात्रा के मध्य आचार-विचार, भाषा-व्यवहार  संस्कार- संस्कृति – मदद सेवावृति, सत्य-असत्य के कण जो शरीर में पौने तीन करोड़ छिद्र में निवास कर रहे हैं उनका मंथन कर संसारी यात्रा कर रहा है!

 हे भव्य प्राणी- सकारात्मक विचारों से स्वभाव और व्यक्तित्व की उत्पत्ति होती है वे कर्म को संयम की डोरी से बाँध कर जिन्दगी की यात्रा सीढ़ी दर सीढ़ी द्वारा ऊचाईयों पर पहुंचाते हैं।मन हमेशा चलाय मान रहता है, असफलता हमेशा शोर मचाती है और सफलता हमेशा खामोश रहती है। कहते हैं समय बड़ा कठोर है, वह अपनी कीमत वसूल करता है।

 हे सज्जन – वक्त का पहिया जब घूमता है तो अतीत और भविष्य पलकों पर तैरने लगते हैं। समय बहरा है कभी किसी की सुनता नहीं, लेकिन अन्धा नहीं है, देखता सब कुछ है। जीवन तो परलोक का खेत है, जो अभी यहाँ बोया जाता है, और परलोक में काटा जाता है। इसमें शुभ कर्मों की फसल बोई है या अशुभ कर्मों की ।

जिन्दगी की यात्रा में दो यंत्र हैं, आत्मा और हृदय ! सोच आत्मा का भोजन है, धर्म हृदय की गुफा। सोच और धर्म प्रक्रिया से ही आचार-विचार, भाषा (वाणी) संस्कार. संस्कृति, मदद- सेवावृत्ति, सत्य और असत्य का परीक्षण होता है, ये ही स्वभाव और व्यक्तित्व का निर्णायक फैसला कर जिन्दगी की यात्रा को सफलता असफलता के मार्ग पर दौडाते रहते हैं।

 है आचार-विचार के तत्व ज्ञानी – दौड रही है जिन्दगी. कभी विकृत विचारों से अहंकार की पगडी सहित, कभी साधना की झाडू से साफ कर मन को सयंम की डोरी से कस के जीवन की पटरी पर ! याद कर मन का आँगन साफ है, तो प्रभु आनन्द के रूम में प्रकट हो सकते हैं।

जिन्द‌गी की यात्रा के अधेरै पथ में सूरज बन कर रोशनी कर जीवन की उर्जा ही जिन्दगी का निखार है। जिन्दगी की यात्रा कभी खतम नहीं होती, मौत तो रास्ता बद‌लती है। अपकी भब्य छवि को निखारने  के लिए जीवन में तीन फैक्ट्रि‌याँ खोलकर रखें- [१] दिमाग में आईसक्रीम की फैक्ट्री । [२] जुबान में सुगर फैक्टी [३] दिल में लव फैक्ट्री ।  होठों से शब्दों के बाण ऐसे छोड़े जो सबके दिल को छू जाएँ । जिज्ञासा के साथ जीवन यात्रा

शुभ हो एवं खुशियाँ आँपके आँगन में झलकती रहें।जीवन डायरी में अंकित करें।

 लाई हयात आए  कजा ले चली  चले”
अपनी खुशी न आये न अपनी खुशी चले !

हयात = जिन्दगी, कजा = मौत

 

छगनलाल जैन, हरसाना वाले
रि. अध्यापक
शालीमार, अलवर

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