श्री पल्लीवाल जैन डिजिटल पत्रिका

अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा

(पल्लीवाल, जैसवाल, सैलवाल सम्बंधित जैन समाज)

निराशा से बचें

जीवन के प्रत्येक पल को आशा, विश्वास और प्रसन्नता के साथ जीकर उत्सव मनाना सीखिए क्योंकि मानव जीवन एवं बीता हुआ समय बार-बार नहीं मिलता है ! निराश, हताश एवं उदास मन जीवन प्रगति में सबसे बड़े अवरोधक का कार्य करता है !

निराशा अर्थात सफलता की दिशा में अपने बढ़ते हुए कदमों को रोककर परिस्थितियों के आगे हार मान लेना है ! निराशा का अर्थ मनुष्य की उस मनोदशा से है, जिसमें स्वयं द्वारा किए जा रहे प्रयासों के प्रति अविश्वास उत्पन्न हो जाता है !

निराशा, जीवन और प्रसन्नता के बीच एक अवरोधक का कार्य करती है क्योंकि जिस जीवन में निराशा, कुंठा, हीनता आ जाए वहाँ सब कुछ होते हुए भी व्यक्ति दरिद्र, दुःखी और परेशान ही रहता है !

स्वयं की क्षमताओं पर, प्रयासों पर और स्वयं पर भरोसा रखो ! दुनिया में कोई भी अवरोधक ऐसा नहीं जो मनुष्य के प्रयासों से बड़ा हो, इसलिए जीवन को निराशा में नहीं प्राप्त्याशा में जियो !

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