हमारे जीवन को सुव्यवस्थित चलाने के लिए संस्कार की बहुत आवश्यकता होती है !संस्कार ही है जो हमारे जीवन में संवेदनाएं दया प्रेम आत्मीयता वात्सल्य और आनंद भरता है ! संस्कार के अभाव में जीवन व्यर्थ हो जाता है , बिना संस्कार के जीवन ऐसे व्यतीत होता है जैसे जड़ के बिना पेड़ !संस्कार हमारे जीवन का मूल है !
1. संस्कार के अभाव के कारण :-
(अ) आधुनिक शिक्षा :- आज स्कूल में आधुनिक शिक्षा के नाम पर बच्चों को पैसा कमाने की मशीन बनाया जा रहा है और इस क्रम में बच्चों के अंदर संस्कार का भाव संवेदना की कमी प्रेम और अपनापन कम होता जा रहा है ! बच्चे बचपन से ही स्वार्थी होते जा रहे हैं उन पर पश्चिम सोच हावी होती जा रही है, वह हर चीज को युज एंड थ्रो की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं , फिर चाहे घर परिवार ही क्यों ना हो और इसी कारण रिश्तो में दरार आ रही है !आज के बच्चों के लिए कोई भी रिश्ता अपने स्वार्थ से ऊपर नहीं है चाहे फिर मां-बाप ही क्यों ना हो और इसी वजह से आगे चलकर वह बच्चे संस्कारहीन और क्रूर होते जा रहे हैं!
(ब) उपभोक्तावादी सोच :- आज हर रिश्ते में उपभोक्तावादी सोच ने घर कर लिया है ! आज हर कोई व्यक्ति रिश्ते में प्रेम ढूंढने की बजाय लाभ और हानि ढूंढ रहा है , जिस रिश्ते में लाभ है उन रिश्तो से मतलब रखते हैं और जहां रिश्तो में कोई लाभ की गुंजाइश न हो वह रिश्ते बोझ लगने लगते हैं !
(स) सोशल मीडिया :- आज इंसान को संवेदनाहीन बनाने में सोशल मीडिया का सबसे बड़ा रोल है ! आज हम बचपन से ही बच्चों को एंड्रॉयड फोन पकड़ा देते हैं और उसमें बच्चे न जाने क्या-क्या देखते हैं और उसकी वजह से बच्चों के अंदर संवेदनहीनता और क्रूरता बढ़ती जा रही है बच्चों के अंदर कुर्ता इतनी ज्यादा बढ़ जाती है कि अगर उनके मन मुताबिक काम ना हो तो फिर वह हिंसा पर उतारू हो जाते हैं मरने मरने को भी तैयार हो जाते हैं !
(द) एकल परिवार :- एकल परिवार भी संस्कार की कमी का एक मुख्य कारण है ! पहले परिवार संयुक्त हुआ करते थे तो बच्चों को घर के बड़े बुजुर्ग संस्कारवान बना देते थे लेकिन आज एकल परिवार हो गया है घर में बुजुर्ग होते ही नहीं है इसकी वजह से बच्चे मोबाइल में लगे रहते हैं और संस्कार से दूर होते जा रहे हैं !
2. संस्कार के अभाव का परिणाम :-
(अ) जीवन में अशांति :- संस्कार के अभाव के कारण पूरा जीवन अशांत हो जाता है !संस्कार के अभाव के कारण इंसान सदा लोभ और लालच से ग्रसित रहता है और हर जगह अपने स्वार्थ की पूर्ति में लगा रहता है और इस कारण उसके जीवन में सदा अशांति रहती है वह स्वयं भी अशांत रहता है और दुनिया में भी अशांति फैलाता है !
(ब) परिवार में अशांति :- जिस परिवार में संस्कार नहीं होते वह परिवार हमेशा अशांत रहता है ! उसे परिवार के सभी मेंबर अपनी स्वार्थ की पूर्ति के लिए एक दूसरे से लड़ते झगड़ते रहते हैं और हर जगह अपनी स्वार्थ की पूर्ति की कोशिश करते हैं और इस वजह से उसे परिवार में सदा अशांति बनी रहती है !
(स) समाज में अशांति :- संस्कार की कमी के कारण लोग समाज में भी अशांति फैलाते हैं !जिस समाज में संस्कार की कमी होती है उसमें लोग एक दूसरे से लड़ना झगड़ना, एक दूसरे को नीचा दिखाना , अपने अहंकार और स्वार्थ की पूर्ति में लगे रहते हैं और इस कारण उसमें अशांति का वातावरण बना रहता है!
(द) दुनिया में अशांति :- जिन लोगों में संस्कार की कमी होती है वह लोग घर परिवार समाज में तो अशांति फैलाते ही हैं दुनिया में भी अशांति फैलाते हैं ! ऐसे ही लोग होते हैं जो दुनिया में बड़े-बड़े कांड करते हैं और दुनिया में शांति नहीं चाहते हैं ! दुनिया में जितने भी दहशत दर्द लोग हैं वह सब लोग संस्कार के अभाव से ग्रसित होते हैं, अगर ऐसे लोगों को बचपन से ही संस्कार दिए जाते तो दुनिया में अशांति नहीं होती
3. संस्कार की कमी का निवारण :-
(अ) शिक्षा में सुधार :- अगर हम देश और दुनिया में अमन और शांति चाहते हैं तो बच्चों को बचपन से ही संस्कारवान शिक्षा देने की जरूरत है ! बच्चे बचपन में जो शिक्षा ग्रहण करते हैं , जीवन भर वैसा ही आचरण करते हैं ! इसलिए हमें स्कूली शिक्षा में सुधार लाने की जरूरत है ! पहले के जमाने में गुरुकुल हुआ करते थे, उनमें बच्चों की प्रतिभा को निखारा जाता था और बचपन से ही बच्चों में संस्कार गढ़ दिए जाते थे जिस वजह से बच्चे बड़े होने के बाद भी अपने संस्कारों को नहीं भूला करते थे ! गुरुकुल में बच्चों को माता-पिता के चरण स्पर्श करना , बड़ों का आदर करना , कैसे बोलना है कैसे चलना है , क्या खाना यह सारी शिक्षाएं दी जाती थी , इस वजह से बच्चा बहुत संस्कारवान बनता था और बचपन में ही बच्चों की नींव मजबूत कर दी जाती थी जिससे बच्चे जीवन भर संस्कारवान बने रहते थे !
(ब) परिवार में संस्कार :- स्कूली शिक्षा के साथ हमें अपने बच्चों को घर पर भी संस्कार देने की बहुत आवश्यकता है ! बच्चों के मन पर घर परिवार के माहौल का और संस्कार का बहुत गहरा असर पड़ता है !इसलिए अगर बच्चे को संस्कारवान बनाना है तो बचपन से ही उसे माता-पिता के चरण स्पर्श करना , बड़ों का आदर करना , मंदिर जाना , पूजा पाठ अभिषेक करना यह सारी शिक्षा देनी चाहिए ! जो घर संस्कारवान होते हैं उन घर के ही बच्चे आगे चलकर अपने परिवार समाज और देश का नाम रोशन करते हैं !
(स) धर्म गुरुओं का सानिध्य :- बच्चों को संस्कार के लिए धर्मगुरु का सानिध्य बहुत जरूरी है !इसलिए समय-समय पर बच्चों को धर्मगुरु का सानिध्य भी दिलवाते रहना चाहिए ! अगर आपके शहर में जब जब धर्म गुरुओं का आगमन हो तो बच्चों को रोजाना धर्मगुरु के दर्शन तथा उनके उपदेश सुनने के लिए ले जाना चाहिए , इसके अलावा जब भी समय मिले बच्चों को पिकनिक ले जाने की बजाय धार्मिक यात्राएं करवानी चाहिए तथा बच्चों को संस्कार वान बनाने के लिए हमारे गुरुओं द्वारा लिखी गई पुस्तक तथा धर्म ग्रंथ का वाचन भी समय-समय पर करवाना चाहिए !
(द) सात्विक भोजन :- कहते हैं जैसा खाओ अन वैसा हो जाए मन और जैसा पियो पानी वैसी होगी वाणी , इसलिए अगर हमें बच्चों को संस्कारवान बनाना है तो उनके खाने-पीने का भी बहुत ध्यान रखना चाहिए ! आज बच्चे घर का भोजन करना पसंद ही नहीं करते हैं , बाहर जाकर भोजन करना उल्टी सीधी चीज खाना , फास्ट फूड को ज्यादा पसंद कर रहे हैं और इस वजह से उनका मन हमेशा चिड़चिड़ा और उग्र बना रहता है क्योंकि तामसिक भोजन करने वाले व्यक्ति का मन भी तामसिक हो जाता है और वह हमेशा दुनिया में अशांति फैलाते रहते हैं !
जिस व्यक्ति का जीवन संस्कारवान होता है वह व्यक्ति हमेशा प्रसन्नचित और आनंदित रहते हैं और दुनिया में शांति का संदेश देते हैं संस्कारवान व्यक्ति का जीवन हमेशा सही दिशा में कार्य करता है और परिवार समाज देश और दुनिया के लिए कुछ ना कुछ सृजन करता रहता है, जबकि संस्कार के अभाव वाला व्यक्ति हमेशा विनाश करने के बारे में सोचता रहता है !
महेंद्र कुमार जैन ( लारा)