सम्माननीय समाज बन्धुओं,
सादर जयजिनेन्द्र ।
अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा को हमारे बुजुर्गों ने अपने खून पसीने से सींच कर वटवृक्ष बनाया है। लेकिन अब इस वटवृक्ष को कुछ चन्द लोग अपने स्वार्थों की पूर्ति के लिए खोखला कर रहे है और महासभा के गौरवशाली इतिहास को खत्म करने में लगे हुए है। यदि इनको नहीं रोका गया तो निश्चित रूप से ये हमारे बुजुर्गों द्वारा बनायी इस महान संस्था को खत्म कर देंगे । वर्तमान में पूर्व महामंत्री श्री महेश जी, झोटवाड़ा अलीपुर वाले के द्वारा नागपुर और हस्तिनापुर के दोषियों के साथ मिलकर दलगत राजनीति को चरम पर पहुंचा दिया है। श्री महेश जी चाहते हैं कि श्री त्रिलोक चन्द जी और श्री भागचन्द जी रबर स्टैम्प बन कर रहे ताकि ये और इनके साथी अपनी मनमानी कर सके लेकिन जिनका स्वाभिमान जिन्दा है, वो ऐसा कभी नहीं होने देगें । राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री त्रिलोक चन्द जी ने हमेशा सकारात्मक सोच के साथ एक होने की पहल की थी। जिसके अनेक उदाहरण है। महेश जी के घर गये थे, सद्भावना मिटिंग, सद्भावना कमेटी, साधारण सभा, प्रतिनिधि सम्मेलन आदि, लेकिन महेश जी की हठधर्मिता के आगे एक नहीं चली बल्कि झूठ व उनके कृत्य और कारनामों ने समाज को कोर्ट-कचहरी में पहुंचा दिया |
पूर्व महामंत्री महेश जी, झोटवाड़ा अलीपुर वाले ने जिन लोगों के विरोध में चुनाव लड़ा, हस्तिनापुर काण्ड के बाद जिन लोगों के विरोध में लम्बे-लम्बे पत्र लिखें उन्हीं लोगों के साथ मिल कर कार्यकारिणी सदस्यों को पद का लालच देकर अपने साथ मिलाकर दलगत राजनीति का गन्दा खेल खेल रहे हैं। समाज तो हस्तिनापुर में ही इनको नकार चुका है फिर भी ये सभी मिल कर दलगत राजनीति कर रहे हैं। आज ये पल्लीवाल पत्रिका में पूरे समाज की दुहाई दे रहे है और लिख रहे है कि पूरा समाज हमारे साथ है जबकि वास्तविकता यह है कि यदि ऐसा होता तो इन्होंने जो अलवर में सम्मेलन किया उसमें कागजों में संख्या बल दिखाने के लिए घर-घर जाकर रजिस्ट्ररों में हस्ताक्षर करवाने की आवश्यकता नहीं होती। इस सम्मेलन में जयपुर के तथाकथित दो-दो पदाधिकारी होने के बावजूद जयपुर से 10-12 व्यक्ति भी नहीं पहुंचे। इसी प्रकार ग्रामीण क्षेत्रों से भी संख्या लगभग नगण्य रही। इस सम्मेलन में मात्र अपने खास चहेते और तथाकथित पदाधिकारियों के परिवार जन और रिश्तेदारों की ही सम्मेलन में भागीदारी थी। इस सब के बावजूद भी पूरे सम्मेलन में कुल संख्या लगभग 250 से 300 ही थी । इस प्रकार समाज ने इस सम्मलेन के साथ-साथ इनको भी नकार दिया है।
बन्धुओं पूर्व महामंत्री महेश जैन, झोटवाड़ा अलीपुर वाले ने आज पल्लीवाल पत्रिका पर कब्जा कर अपने हर गलत निर्णय, गलत कार्यों और अपनी हठधर्मिता पर पर्दा डालने का कार्य इस पत्रिका के माध्यम से कर रहे है साथ ही झूठ और तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर इस पत्रिका के माध्यम से समाज को परोस रहे है, इससे इस पत्रिका की विश्वसनीयता ही खत्म हो गई साथ ही इसका स्तर भी दिन प्रति दिन गिरता जा रहा है। इसलिए आज पल्लीवाल डिजीटल पत्रिका बहुत ही कम समय में समाज के हर वर्ग तक अपनी पहुंच बना चुकी है। डिजीटल पत्रिका का स्तर और इसकी निष्पक्षता आज समाज की पहचान बन चुकी है ।
बन्धुओं, इन्होने पत्रिका के पिछले अंक में समझौते और कोर्ट-कचहरी की बात लिखी है। जो बिल्कुल झूठ और तथ्यों से परे हैं। इस अंक में लिखा है कि अध्यक्ष जी को एक होने का प्रस्ताव दिया था। यह बात पूरी तरह से सच नहीं है। हकीकत तो यह है कि श्री देवकीन्दन जी, श्री एम.पी. जैन साहब एवं श्री महेश जी के परम और खास मित्र श्री गिरीश जी किसी कार्यक्रम में ये सब मेरे साथ गये थे। उस समय आदरणीय श्री देवकीनन्दन जी ने स्वयं यह प्रस्ताव सब के बीच रखा कि इस झगड़े को खत्म करना चाहिए। मेरे द्वारा कहा गया कि श्री महेश जी किसी की बात नही मानते, और ना ही मानेगें। आदरणीय श्री देवकीनन्दन जी ने कहा कि महेश जी की गारण्टी मैं लेता हूँ। उन्होंने प्रस्ताव रखा कि या तो सभी पदाधिकारी संस्था को मिलकर चला लों, या चुनाव करवा दो जिससे यह झगड़ा ही खत्म हो जायेगा ।
मेरे द्वारा अध्यक्ष महोदय श्री त्रिलोक चन्द जी, अर्थमंत्री महोदय श्री भागचन्द जी को कहा कि श्री देवकीनन्दन जी का इस तरह का प्रस्ताव है और यही समाज हित में उचित रहेगा और हम सब पुनः एक हो सकते है । समाज हित में हम सभी के द्वारा इस प्रस्ताव पर गम्भीरता से विचार-विमर्श किया गया। मैने सभी से चर्चा कर उसी के अनुसार श्री देवकीनन्दन जी को फोन किया और कहा कि सभी की राय है कि अलवर के कार्यक्रम को 15 दिन आगे सरका लो और सब मिलकर इस कार्यक्रम को आयोजित कर लेगें। सब मिल कर करेंगे तो समाज में गुटबाजी भी खत्म हो जायेगी और सम्पूर्ण समाज की कार्यक्रम में भागीदारी भी होगी। लेकिन आदरणीय देवकीनन्द जी का कोई जबाव नहीं आया ।
इसके पश्चात् कार्यक्रम की तिथि से एक दिन पहले कोर्ट की तारीख पर अध्यक्ष महोदय से कहा गया कि आप कल के कार्यक्रम में आ जाओं । अध्यक्ष महोदय ने कहा कि जब आपके द्वारा प्रस्ताव दिया गया और हम सभी ने समय रहते स्वीकृति भी दे दी थी लेकिन आपका कोई जबाव नहीं आया और आज एक दिन पहले आप कह रहे है कि कल आ जाओ। मैं अकेले आकर क्या करूंगा ? या तो पूरा समाज, सभी कार्यकारिणी के सदस्य और जो नियुक्त किये गये सदस्य है वो सभी आये तभी मेरा आना सार्थक है। इसमें त्रिलोक जी के द्वारा क्या गलत कहा गया ? जिसको महेश जी ने पत्रिका के माध्यम से इस तरह से व्यक्त किया की त्रिलोक जी कोई वार्ता नही करना चाहते। जबकि अध्यक्ष साहब शुरू से ही सकारात्मक सोच के साथ हमेशा एक होने की पहल करते रहे हैं।
इस विवाद को खत्म करने के लिए महासभा के द्वारा अलवर में 25 व 26 अगस्त का सम्मेलन आयोजित किया गया था, जिसमें अध्यक्ष महोदय द्वारा महेश जी को हमेशा साथ लेकर चले। इस कार्यक्रम के प्रत्येक बेनर, पत्रिका में महेश जी के नाम थे। उसके बावजूद भी श्री महेश जी शामिल नही हुये, और लोगों को रोकने में लग गये और कहा कि त्रिलोक जी का व्यक्तिगत प्रोग्राम है। इसके विपरीत स्वयं महेश जी के द्वारा समाज में विघटन फैलाने के लिए अपना जो अलवर में सम्मेलन के नाम पर निजी कार्यक्रम आयोजित किया गया उसमें आयोजन की तिथि से एक दिन पहले श्री त्रिलोक जी से कह रहे है कि कल कार्यक्रम में आ जाओं, क्या ये उचित था ?
अध्यक्ष जी और अर्थमंत्री जी दोनों आपसी समन्वय के लिए महेश जी के घर गये पूरे दिन चर्चा कर समन्वय के साथ आगे बढ़ने हेतु निवेदन किया गया लेकिन महेश जी अपनी हठधर्मिता के कारण समन्वय के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं हुए। इसके बाद अध्यक्ष महोदय ने सदभावना बैठक बुलाई, उसमें भी नही आये, सदभावना कमेटी ने बुलाया, उसमें भी नही आये, अधिवेशन किया उसमें भी नही आये, आप सभी समाज जन बतायें कि बिना वार्ता के यह विवाद कैसे खत्म होता……? और जबकि महेश जी कहते है कि मेरे पास बहुमत है तो ये 25 और 26 अगस्त को आयोजित अलवर सम्मेलन में पूरे बहुमत से आते और समाज जन के सामने अपनी बात रखते, निश्चित रूप से समाधान निकलता लेकिन महेश जी ने कभी नहीं चाहा कि सभी पदाधिकारी एक होकर महासभा को चलाये जिससे समाज का विकास हो ।
इसी पत्रिका के माध्यम से बार-बार जमीन घोटाले में लिप्त पारस चन्द जैन लिखा जा रहा हैं। यह अलग बात है कि ये आज तक एक रूपये के घोटाले को भी साबित नहीं कर पाये हैं। आश्चर्य की बात तो यह है कि अपने चहेते व्यक्तियों की कई जाँच कमेटियों बनाने के बाद भी आज तक उस घोटाले को साबित नहीं कर पाये। जयपुर शाखा को प्राप्त 4000 वर्ग गज जमीन के इस कार्य को जयपुर शाखा द्वारा बिल्डर के माध्यम से किया गया है। इस कार्य में रूपयों का लेन-देन क्रेता और बिल्डर के मध्य हुआ है। महेश जी ने स्वयं इस कॉलोनी में प्लाट लिया था, प्लाट की एवज में ही समाज की 4000 वर्ग गज जमीन का जेडीए पट्टा बिल्डर के द्वारा समाज को देना था। इन्होने इस प्लाट की एवज में बिल्डर के लगभग बारह लाख रूपये नही दिये इसलिए बिल्डर ने जेडीए पट्टा समाज को नहीं दिया। श्री महेश जी की सिविल खराब होने के कारण बैंक से भी लोन नहीं हुआ इस कारण ये डिफाल्टर हो गये जिससे समाज को जेडीए पट्टा नहीं मिल पाया। इनके प्लाट के पेटे जो एडवांस राशि इन्होंने बिल्डर को दी थी उसको वापिस लेने के लिए भी इन्होंने पत्र व्यवहार सीधे बिल्डर से किया था न कि जयपुर शाखा से (महेश जी द्वारा बिल्डर को लिखा गया पत्र संलग्न है ) । इससे भी यह साबित होता है कि रूपयों का लेन-देन सीधे क्रेता और बिल्डर के मध्य हुआ है। इसलिए घोटाले का तो कोई सवाल ही पैदा नहीं होता बल्कि इसी पल्लीवाल पत्रिका में इनके ग्रुप के साथी तत्कालीन पत्रिका संयोजक श्री चन्द्रशेखर जैन ने जब यह कार्य पूर्ण हुआ तो अपने सम्पादकीय में बधाई देते हुए इस जमीन की और जयपुर शाखा की तारीफ के पूल बांध दिये थे जो इस पत्र के साथ संलग्न है। फिर भी मेरा दावा है कि मैं और तत्कालीन जयपुर शाखा के किसी भी सदस्य द्वारा एक रूपये का भी इस कार्य में यदि घोटाला साबित हो जाए तो समाज जो सजा देगा वो मैं भुगतने के लिए तैयार हूं।
पूर्व महामंत्री श्री महेश जैन, झोटवाड़ा अलीपुर वाले मुझे बार- बार बिना तथ्यों के जमीन घोटाले में लिप्त बता रहे है जो यह आज तक साबित नहीं कर पाये लेकिन खुद अपने गिरबान में कभी नहीं झांकते है। मुझे तो लगता है कि श्री महेश जी अपने जैसे ही सभी को समझते हैं। जो खुद घोटालेबाज होते है उन्हें सभी घोटालेबाज ही नजर आते हैं। इनके घोटालो का एक छोटा सा उदाहरण इन्हीं के झोटवाड़ा में इनके खास साथी जो श्री जैन श्वोताम्बर पल्लीवाल समिति, झोटवाड़ा से जुड़े हुए है उन्होंने बताया कि श्री महेश जी ने अपने चुनावी मीटिंगों में जैन श्वेताम्बर पल्लीवाल समिति, झोटवाड़ा के फण्ड का इस्तेमाल किया है जबकि यह पैसा समाज का है। इस बात के सबूत भी इन्हीं के खास व्यक्ति द्वारा मुझे दिये गये है। अब क्या महेश जी श्री जैन श्वेताम्बर पल्लीवाल समिति, झोटवाड़ा की आडिट करवायेंगे या ये जो घोटाले कर रहे है उसकी जाँच के लिए कोई जाँच कमेटी बनायेंगे ? अब समाज निर्णय करें कि मन्दिर घोटाले में लिप्त श्री महेश जैन, झोटवाड़ा अलीपुर वाले जो धार्मिक कार्य के पैसे को अपने व्यक्तिगत कार्यों के लिए उपयोग करते है, क्या वो समाज हित के बारे में सोच सकते है ?
बन्धुओं, जिस प्रकार पिछली कार्यकारिणी में पूर्व महामंत्री श्री राजीव रतन जी ने हठधर्मिता अपनाते हुए समाज की एक नहीं सुनी उसी प्रकार वर्तमान में श्री महेश जी भी उन्हीं के पदचिन्हों पर चलकर हठधर्मिता अपना रहे हैं। अपनी हठधर्मिता के आगे ये श्री त्रिलोक चन्द जी, अध्यक्ष और श्री भागचन्द जी, कोषाध्यक्ष की बात न तो सुन रहे है और न ही मान रहे है तो समाज की क्या सुनेंगे। इसी प्रकार अपनी गलतियों को छुपाने के लिए महासभा के वरिष्ठ सदस्यों को महासभा से निकालना और किसी के भी खिलाफ पत्रिका में अर्नगल बातें प्रकाशित करना, अधिकार न होते हुए भी समाज में वैमनस्यता फैलाने के लिए सम्मेलन करना आदि। ऐसी स्थिति में महासभा को समाज की बात कहने के लिए एक ही रास्ता बचता है और वो माननीय न्यायालय का । इसलिए महासभा को समाज की बात रखने के लिए माननीय न्यायालय का सहारा लेना पड़ता है।
बन्धुओं महेश जी के कृत्यों एवं कारनामों की अति होने के कारण समाज का पक्ष रखने के लिए महासभा को माननीय न्यायालय में जाने के लिए मजबूर जरूर होना पड़ रहा है लेकिन मैं आप सभी को विश्वास दिलाता हूं कि न्यायालय में समाज का पक्ष रखने के लिए केसों पर होने वाले खर्चों को कभी भी समाज के पैसों से वहन नहीं किया गया है बल्कि हम हमारी जेब से सारा पैसा समाज के लिए खर्च कर रहे है जबकि महेश जी द्वारा खुद विवाद पैदा कर कोर्ट का सारा खर्चा समाज के पैसों से किया जा रहा है। इतना ही नहीं बल्कि द्वेषता के कारण जयपुर शाखा को प्राप्त निःशुल्क 4000 वर्ग गज जमीन को विवादित बनाने के लिए मेरे ऊपर केस करने के लिए भी समाज से पैसा उगाया जा रहा है। शायद समाज को ऐसा पहली बार देखने को मिल रहा है कि खुद की व्यक्तिगत द्वेषता और खींज मिटाने के लिए समाज से पैसा उगाया जा रहा है। मैं पूरे समाज को विश्वास दिलाता हूं कि मैं पूरी ईमानदारी से समाज सेवा के इस कार्य को आगे बढ़ाने के लिए प्रयत्नशील हूं और कर रहा हूं। लेकिन महेश जी के बार-बार अवरोध पैदा करने के कारण हमें बहुत दिक्कतों का सामाना करना पड़ रहा है इसलिए माननीय न्यायालय का सहारा लेना पड़ रहा है।


पारस चन्द जैन
राष्ट्रीय महामंत्री
अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा
Best compliments